भाग्यद लक्ष्मी बारम्म

श्री पुरंदर दासरु

राग: श्री

ताळ: झंपॆ

 

भाग्यद लक्ष्मी बारम्म । नम्मम्म नी सौ

भाग्यद लक्ष्मी बारम्म                    ॥प॥

 

गॆज्जॆकाल्गळ ध्वनिय माडुत । हॆज्जॆय मॆलॆ हॆज्जॆयनिक्कुत।

सज्जन साधु पूजॆय वेळॆगॆ । मज्जिगॆयॊळगिन बॆण्णॆयंतॆ     ॥ १॥

 

कनकवृष्टिय करॆयुत बरॆ । मनकॆ मानव सिद्धिय तोरॆ ।

दिनकर कोटि तेजदि होळॆयुव । जनकरायन कुमारि बेग     ॥ २॥

 

अत्तित्तगलदॆ भक्तर मनॆयलि । नित्य महोत्सव नित्य सुमंगळ।

सत्यव तोरुव साधु सज्जनर । चित्तदि हॊळॆव पुत्तळि बॊंबॆ    ॥ ३॥

 

संख्यॆ यिल्लद भाग्यव कॊट्टु । कंकण कैय तिरुवुत बरॆ।

कुंकुमांकितॆ पंकज लोचनॆ । वेंकटरमणन बिंकद राणि ॥४॥

 

सक्करॆ तुप्प कालिवॆ हरिसि । शुक्रवारद पूजॆय वेळॆगॆ ।

अक्करवुळ्ळ अळगिरि रंगन । चॊक्क पुरंदर विठलन राणि ॥५॥