दॆवरनाम: ना निनगेनु

रचनॆ: श्री श्रीपादरजरु

राग: वसंत (बसंत)

ताळ: त्रिपुट (तीन् ताल्)

 

ना निनगेनु बेडुवुदिल्ल - ऎन्न ।

हृदयकमलदॊळु नॆलॆसिरु हरियॆ

 

शिर निन्न चरणक्कॆरगलि चक्षु ।

ऎरकदिंदलि निन्न नोडलि हरियॆ ॥

करण गीतंगळ केळलि नासिक ।

निर्माल्यानुदिन घ्राणिसलि हरियॆ

 

नालिगॆ निन्न कॊंडाडलि ऎन्न ।

तोळु करंगळ मुगियलि हरियॆ ॥

कालु तीर्थयात्रॆगॆ पोगलि मन ।

बल्पिनिंदलि निन्न स्मरिसलि हरियॆ।

 

चित्त निन्नॊळु मुळुगाडलि निन्न ।

भक्त जनर संग दॊरकलि हरियॆ ॥

वृत्ति तत्वयोगाभ्यासक्कागलि रंग- ।

विठल निन्न दयवागलि हरियॆ                 ॥३॥