देवरनाम: हॊंदि बदुकिरॊ
रचनॆ: श्री जगन्नाथ दासरु
राग: आरभि
ताळ: आट
हॊंदि बदुकिरॊ राघवेंद्र रायर ॥प॥
कुंददॆम्मनु करुणदिंद पॊरॆवर ॥अ प॥
नंबि तुतिसुव नकदंबकिष्टव
तुंबि कॊडुवरु अन्यर्हंबलीयनु ॥१॥
अलवबोधर समतजलधिचंदिर
ऒलिदु भक्तर काय्व सुलभ सुंदर ॥२॥
गुरु सुधिंद्रर विमलकरजरॆनिपर
स्मरिसि सुरुचिर विमलचरण पुष्यर ॥३॥
घाललोचन विनुत मूलरामन
लीलॆयनुदिन तुतिप शील सद्गुण ॥४॥
भूत भावन जगन्नाथविठलन
प्रीतिपात्रन नंबिरीतनुदिन ॥५॥